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Monday, September 27, 2010

Main Student No. 420

I wrote this one when I was in First Professional M.B.,B.S.

मैं Student No. 420
RNT की सलाखों से बाहर देखता हूँ,
दिन, हफ्ते, महीनों को Semester में बदलते देखता हूँ|
इसके Cafe से मुझे किसी सस्ते ढाबे की खुशबू आती है,
इसकी Building मुझे Central Jail नज़र आती है|

वो कहते हैं यह College है,
फिर क्यूँ यह मुझे School से बदतर लगता है?
वो कहते हैं मैं इसका Student हूँ,
फिर क्यूँ यह मुझे अपना नहीं लगता है?


मैं Junior No. 420
RNT के गलियारों से गुज़रता हूँ,
यारों की धीमी साँसों, तेज़ धडकनों को सुनता हूँ|
Canteen की खुशबू उनमें तफरी की चाह जगाती है,
पर Quantum की याद इच्छा को ठंडा कर जाती है|

वो कहते हैं की यह दस्तूर है,
फिर क्यूँ यह मुझे अत्याचार लगता है?
वो याद दिलाते हैं की यह तो कुछ भी नहीं,
तो यह मुझे उनका प्यार लगता है|


मैं Roll No. 49
L.T. की ओर रुख करता हूँ,
बड़े विश्वास से Class में कदम रखता हूँ,
Class के माहौल से Semester के Result की बू आती है,
और साथ ही डर के मारे बदन में कंपकंपी छूट जाती है|

वो कहते हैं की मैं Pass हुआ हूँ,
फिर क्यूँ मुझे Fail से बदतर लगता है?
इसीलिए यारों, यार अगर ढकनी हो तो,
खुद Pass होना भी नहीं भाता है|

Friday, August 29, 2008

इंसान, इंसान से घबरा रहा

इंसान, इंसान से घबरा रहा

धमाकों की गूँज से ज़र्रा ज़र्रा थर्राह रहा
यह देख भारत माँ का दिल कराह रहा
देख आज इंसान, इंसान से घबरा रहा

कहीं रहीम को रुला, वह "हे राम" का नारा लगा रहा
राम को मौत की नींद सुला कोई "रहीम का बंदा" कहला रहा
देख आज इंसान इंसानियत को भुला रहा

कोई हरी पताका, कोई भगवा ध्वज फहरा रहा
गली गलियारों, चौक चौबारों में रंग लाल बह रहा
देख आज इंसान ख़ुद को विधाता कह रहा

भाषा धर्म के नाम पर इंसान बरगला रहा
और सत्ता का लोभी वह हैवान बेखौफ हंस रहा
देख आज इंसान , इंसान का तमाशा बना रहा

गरीब और गरीब, और अमीर, अमीर होता जा रहा
आम ज़िन्दगी से नेता और नेता से आम इंसान कतरा रहा
देख कैसे आज इंसान, इंसान से घबरा रहा

जो इस धरती पर जन्मा, गुणगान कहीं और के कर रहा
यह देख मेरी माँ का दिल पसीज पसीज कर रो रहा
देख आज इंसान मिटटी से बेगाना हो रहा

खून के कतरों, मांस के चीथ्रों में वोट बीन रहा
सुरक्षा की तोप और मवेशी के चारे में नोट गिन रहा
कितना नीचे देख , आज इंसान गिरा जा रहा

तमाशबीन न तुम, तमाशबीन न मैं
तमाशा है ख़ुद, हर वह इंसान
जो हाथ पर हाथ धरे यह तमाशा देखे जा रहा

Wednesday, August 27, 2008

Insaan, Insaan se ghabra raha

Dhamaakon ki goonj se, zarra zarra tharraah raha
Yeh dekh Bharat Maa ka dil karaah raha
Dekh aaj insaan, insaan se ghabra raha

Kahin Rahim ko rula, wah "He Ram" ka naara laga raha
Ram ko maut ki neend sula, koi "Rahim ka banda" kehla raha
Dekh aaj insaan, insaaniyat ko bhula raha

Koi hari pataaka, koi bhagwa dhwaj fehra raha
Gali Galiyaaron, Chauk Chaubaron mein rang laal beh raha
Dekh aaj insaan, khud ko vidhaata kehla raha

Bhaasha Dharm ke naam par, insaan bargala raha
Aur satta ka lobhi wah haiwaan, bekhauf hans raha
Dekh aaj insaan, insaan ka tamasha bana raha

Gareeb aur gareeb, aur ameer, ameer hota ja raha
Aam zindagi se neta aur neta se aam insaan katra raha
Dekh kaise aaj insaan, insaan se ghabra raha

Jo is dharti par janma, gungaan kahin aur ke kar raha
Yeh dekh meri Maa ka dil, paseej paseej kar ro raha
Dekh aaj insaan, mitti se begaana ho raha

Khoon ke katron, Maans ke cheethron mein, vote been raha
Suraksha ki tope aur maweshi ke chaare mein, note gin raha
Kitna neeche dekh, aaj insaan gira ja raha

Tamaashbeen na tum, Tamaashbeen na main
Tamaasha hai khud, Har wah insaan
Jo haath par haath dhare yeh tamaasha dekhe ja raha
Le dekh aaj insaan, insaan se ghabra raha

Tuesday, March 25, 2008

Love Bug

Feeling a kiss, concealing a smile, missing a hug
Please tell me, am I bitten by the love bug

Cupid had the bow, it pulled the arrow
Before I could gather, had struck the blow

I pause and ponder, I think and wonder
Nothing until now, could have made me surrender

Till now on my Heart, the mind had played a spy
Now there is feeling, a feeling so so high

My heart is not in place, its house is empty
But the heaven it rests now, has joys in plenty

Now every thought is a poetry, every dream a carnival
Even the mind now, nods to heart in approval

Love overcomes barriers, drives through each bend
Its an incessant feeling, that lacks "The End"

May it last. may it lead from chapter to chapter
So the book may say, "They lived happily ever after"